ट्रस्ट के उत्तराधिकारी की रीति -
01.ट्रस्ट के आजीवन मुख्य ट्रस्टी होंगे।
02.इस ट्रस्ट के अन्य ट्रस्टी आजीवन ट्रस्टी होंगे।
मुख्य ट्रस्टी के उत्तराधिकारी नियम -
01.मुख्य ट्रस्टी द्वारा त्याग पत्र देने अथवा उनका स्वर्गवास हो जाने पर उसका पुत्र उत्तराधिकारी होगा। यह उत्तराधिकारी नियम इसी प्रकार पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहेगा। यदि किसी पीढ़ी में पुत्र नहीं होता है तो पुत्री उत्तराधिकारी होगी, लेकिन यदि किसी बच्चे को गोद लिया जाता है तो पुत्री की सहमति पर उस गोद लिये हुए बच्चे को उत्तराधिकार प्राप्त होगा अथवा मुख्य ट्रस्टी द्वारा नामित व्यक्ति भी मुख्य ट्रस्टी हो सकता है।
(ब) ट्रस्टी का रिक्त स्थान होगा ।
01.ट्रस्टी द्वारा त्याग पत्र देने पर।
02.ट्रस्टी की मृत्यु, पागल होने, न्यायालय द्वारा दिवालिया घोषित होने, न्यायालय द्वारा दण्डित होने पर एवं ट्रस्ट के हित के विपरीत कार्य करने पर मुख्य ट्रस्टी द्वारा हटाये जाने पर।
(स) ट्रस्टियों के उत्तराधिकारी नियम मुख्य ट्रस्टी द्वारा या मुख्य ट्रस्टी की सहमति से बहुमत के आधार पर नया ट्रस्टी लिया जा सकेगा। किसी भी व्यक्ति को जो ट्रस्ट के उद्देश्यों की पूर्ति की इच्छा रखता हो, को ट्रस्टी बना सकते हैं। मुख्य ट्रस्टी की सहमति के बिना कोई ट्रस्टी नहीं लिया जा सकेगा।
(द) नये ट्रस्टियों को लेने के अधिकार ट्रस्ट के ट्रस्टी यह अनुभव करें कि कोई व्यक्ति ट्रस्ट के लिए लाभकारी है एवं उसकी सेवाएँ ट्रस्ट के विकास के लिए आवश्यक है, तो मुख्य ट्रस्टी स्वयं ऐसे महानुभाव को ट्रस्ट का ट्रस्टी बना सकेगा।
नया ट्रस्टी बनाने के लिए सामान्य तौर पर आपसी सहमति बनती है तो ट्रस्ट हित में होगा। ट्रस्टियों का निर्णय मुख्य ट्रस्टी के लिए बाध्यकारी नहीं होगा।
01.ट्रस्ट के आजीवन मुख्य ट्रस्टी होंगे।
02.इस ट्रस्ट के अन्य ट्रस्टी आजीवन ट्रस्टी होंगे।
मुख्य ट्रस्टी के उत्तराधिकारी नियम -
01.मुख्य ट्रस्टी द्वारा त्याग पत्र देने अथवा उनका स्वर्गवास हो जाने पर उसका पुत्र उत्तराधिकारी होगा। यह उत्तराधिकारी नियम इसी प्रकार पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहेगा। यदि किसी पीढ़ी में पुत्र नहीं होता है तो पुत्री उत्तराधिकारी होगी, लेकिन यदि किसी बच्चे को गोद लिया जाता है तो पुत्री की सहमति पर उस गोद लिये हुए बच्चे को उत्तराधिकार प्राप्त होगा अथवा मुख्य ट्रस्टी द्वारा नामित व्यक्ति भी मुख्य ट्रस्टी हो सकता है।
(ब) ट्रस्टी का रिक्त स्थान होगा ।
01.ट्रस्टी द्वारा त्याग पत्र देने पर।
02.ट्रस्टी की मृत्यु, पागल होने, न्यायालय द्वारा दिवालिया घोषित होने, न्यायालय द्वारा दण्डित होने पर एवं ट्रस्ट के हित के विपरीत कार्य करने पर मुख्य ट्रस्टी द्वारा हटाये जाने पर।
(स) ट्रस्टियों के उत्तराधिकारी नियम मुख्य ट्रस्टी द्वारा या मुख्य ट्रस्टी की सहमति से बहुमत के आधार पर नया ट्रस्टी लिया जा सकेगा। किसी भी व्यक्ति को जो ट्रस्ट के उद्देश्यों की पूर्ति की इच्छा रखता हो, को ट्रस्टी बना सकते हैं। मुख्य ट्रस्टी की सहमति के बिना कोई ट्रस्टी नहीं लिया जा सकेगा।
(द) नये ट्रस्टियों को लेने के अधिकार ट्रस्ट के ट्रस्टी यह अनुभव करें कि कोई व्यक्ति ट्रस्ट के लिए लाभकारी है एवं उसकी सेवाएँ ट्रस्ट के विकास के लिए आवश्यक है, तो मुख्य ट्रस्टी स्वयं ऐसे महानुभाव को ट्रस्ट का ट्रस्टी बना सकेगा।
नया ट्रस्टी बनाने के लिए सामान्य तौर पर आपसी सहमति बनती है तो ट्रस्ट हित में होगा। ट्रस्टियों का निर्णय मुख्य ट्रस्टी के लिए बाध्यकारी नहीं होगा।
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